जखन कोनो गामक कोनो नेन्ना  

अबैत छैक शहर 

अपन कल्पना के अपनहिं पीठ पर लधने 

तखन प्रत्येक क्षण नचैत छैक ओकरा आँखि मे – 

विस्मय, हर्ष, थकान, विश्वास आ डर। 

मोन मे रहैत छैक लीलसा 

कंप्यूटर आ धुरझार अंग्रेजीक 

आ दुर्गापूजाक छुट्टी मे गाम जा  

दोस संगे गढ़बाक, 

अपन कल्पनाक ओहि गोरकी विलेती  

छौड़ीक प्रेमक खिस्सा-पिहानी 

मुदा चमकैत साइन बोर्ड आ  

दिवास्वप्नक पम्पलेटक बिर्रो मे 

एकटा ओझराएल अंग्रेजी होमवर्क  

आ ग्रामर के  रटैत  

बीति जाइत छैक समय 

आ ओ कहुना क’ ट’ करैत 

पाबि जाइत अछि नौकरी  

आ संपूर्ण क’ लैत अछि अपन 

तथाकथित दुनियाँ। 

मुदा मोन मे रहैत छै अंग्रेजीक कुंठा 

आ ई कुंठा रसे-रसे परिवर्तित होइत छैक आत्मग्लानि मे, 

आ ओ क्रमशः बिसर’ लगैत अछि अप्पन भाषाक महत्व, 

ओकरा कहाँ बुझल छैक जे  

न्यूज़ीलैंडक ‘FACT’  

जर्मनी आबि ‘FUCK’  भ’ जाइत अछि, 

ओकरा नहिं बुझल छैक जे अंग्रेजीया देश मे 

अंग्रेजीक मतलब ओ नहिं होइत छैक 

जे ओ बुझैत अछि, 

ओकरा कहाँ बुझल छैक जे  

परिवेश सिखबैत छैक भाषाक इलम 

आ भाषा त’ सुच्चा संवेदनाक नाम थीक 

इलमक नहिं।