मैं और गंगा

मैं और गंगा

गंगा समंदर से मिलकर खुश तो नहीं होगी। मुझे पक्का यकीन है कि वह खुश तो नहीं है। मेरा यकीन बेशक मेरे पैमाने से है, पर क्या ‘मेरा पैमाना’ गलत हो सकता है? समंदर में मिलकर गंगा, गंगा कहाँ रह पाती है! वह मीठी नहीं रहती, कोई एक कतरा भी बोतल में समेटकर घर नहीं ले जाता, कोई...
व्यापार

व्यापार

अपने होटल से अभी निकला ही था… गाड़ी मुख्य सड़क को पार कर एक गली से गुजर रही थी। धूप तीखी थी, सड़क जैसे चमक रही थी । एक छोटे बच्चे को सीने से लगाए वो एक प्लास्टिक की कुर्सी पर बैठी थी। उम्र कुछ 32-34 रही होगी, बच्चा शायद 6 महीने का रहा होगा। पीले रंग की साड़ी थी, डीप...
दिल अपनी जगह पर नहीं था

दिल अपनी जगह पर नहीं था

कुछ कहानियाँ शुरू नहीं होतीं… वे धीरे-धीरे खुलती हैं। जैसे किसी इंसान की आँखों में छुपी हुई एक चुप सी थकान, जो पहली नज़र में दिखती नहीं, पर अगर आप थोड़ा ठहर कर देखें… तो बहुत कुछ कह जाती है। राजेश से मेरी मुलाकात भी कुछ ऐसी ही थी। वो एक साधारण सा टैक्सी ड्राइवर...