Avinash 'Beparwah'

ख़ामोश सड़क थी और झमाझम बारिश

मैं भींगकर आज

कपकपातीं हाड़ लेकर सड़क पर टहलता रहा |

कुछ पेड़ पर मुस्कुराते, कुछ सड़क पर बिखड़े

पलास और सेमल के फूल,

मुझे याद आया वो तेरी अठखेलियाँ

तेरा मुस्कुराना, मुझसे लिपट जाना

एक हवा के झोकें में तेरा आहट पाया |

तभी पैर फिसला, अभी पैर फिसला

कपकपातीं हाड़ लेकर सड़क पर संभलता रहा |

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जब बारिश की बूंदे होठों को छूती,

मैं तुझे सोचकर मुस्कुराता रहा |

ऋतुराज संग पाया सावन की खुशबू ,

‘बेपरवाह’ भी देखो करता खयालों की परवाह,

शब्दों को पिरोकर भावनाएँ सजाता रहा |

अभी सर्दी लग गयी

एक चाय बस पिला दे,

दिल में जो तेरे, शिकवा है मिटा दे |

बस तेरी ही हमदम,

बेपरवाह को परवाह,

मैं मासूम नादाँ,

जो महसूस करता, कभी तेरी मोहब्बत

तो ये दिन ना आते, ना ऐसी राते ही होती,

जो बारिश भी होता तो साथ में टहलता,

सर्दी भी लगती तो दोनों को लगती,

‘बेपरवाह’ भी होता, परवाह भी होती |

मैं ख्यालों में खोया चलता रहा-

ख़ामोश सड़क थी और झमाझम बारिश

मैं भींगकर आज

कपकपातीं हाड़ लेकर सड़क पर टहलता रहा |

© अविनाश ‘बेपरवाह’