by crlavinash@gmail.com | Jan 8, 2015 | Medium
हार-जित से तो यूँ हीं बदनाम है जिन्दगी दरअसल, अनिश्चितताओं का खेल है जिन्दगी | जब तक सांस है, तुझमे जद है, सवार लो जिन्दगी | न जाने कब शमशान हो जिन्दगी | हँस लो, मुस्कुरा लो….. ढूँढ लो हर ख़ुशी | क्या पता कब खाक हो जिन्दगी | क्या फ़कीरी, क्या अमीरी क्या इबादत, क्या...