जिन्दगी शायद इसी भाग-दौड़ का नाम है——-अविनाश ‘बेपरवाह’

जिन्दगी शायद इसी भाग-दौड़ का नाम है——-अविनाश ‘बेपरवाह’

ना ग़मों का बादल हटा पाया, ना ही खुशियों की बारिश ला पाया, पुराने चिथड़े की तरह जिन्दगी दरकती रही, कश्मकश में मैं, कभी सिलता रहा, कभी ढकता रहा | फ़क़त फिक्र-ए-ख़ुराक में उलझा ‘बेपरवाह’ वक़्त गुजर जाता है, याद तुम भी आते हो, याद अपना घर भी आता है, पर सपनों की चाहत, अपनों की...