मैं अग्रसर जनक आपके अनुभव और वक्तव्य पर

मैं अग्रसर जनक आपके अनुभव और वक्तव्य पर

फिर से वही उलझन, वही उधेड़बुन किंकर्तव्यविमूढ़ अपने कर्तब्य पथ पर | मस्तिष्क में हलचल, मन विस्मित ‘लेकिन…किन्तु…परन्तु’ मैं अग्रसर जनक आपके अनुभव और वक्तव्य पर | मूल्यहीन समाज मूक-बधिर अर्थ विचार, अर्थ व्यव्हार, अहम् युद्ध, विकृत संस्कार | मैं अबोध अज्ञान निस्वार्थ...