by crlavinash@gmail.com | Dec 16, 2025 | Medium
ये उन दिनों की बात है जब पैरों में कोई लेक्सो का हवाई चप्पल होता था, जिसपर कछुआ छाप से थोड़ा जलाकर हम निशान बना देते थे कि कहीं बदला ना जाये, घुटने से दो बिलांग छोटी बुल्लू (ब्लू) कलर की पैन्ट होती थी, जिसमें जिप की जगह बटन होता था क्यूंकि जिप में अक्सर मेरा फंस जाया...
by crlavinash@gmail.com | Dec 16, 2025 | Medium
कतेको बेर, कतेको केँ बिसरबाक क्रम मे मोन पड़ैत छी बेर-बेर आहाँ अहाँक बाद जतेक ठाम सँ ’आहाँ’क संबोधन भेटल ओ नहिं छल अहाँ सन। कहाँ कियो बुझलक बिनु कहने मोनक गप्प नै कहियो हिचकीये भेल परोक्ष-चर्चा सँ, ओ टेलीपैथी त’ अहिं संग बिलहि गेलैक। ...
by crlavinash@gmail.com | Dec 16, 2025 | Medium
जखन कोनो गामक कोनो नेन्ना अबैत छैक शहर अपन कल्पना के अपनहिं पीठ पर लधने तखन प्रत्येक क्षण नचैत छैक ओकरा आँखि मे – विस्मय, हर्ष, थकान, विश्वास आ डर। मोन मे रहैत छैक लीलसा कंप्यूटर आ धुरझार अंग्रेजीक आ दुर्गापूजाक छुट्टी मे गाम जा दोस संगे गढ़बाक, ...
by crlavinash@gmail.com | Dec 16, 2025 | Medium
अभी काशी से विदा भी नहीं हुआ था कि कूची मष्तिष्क के अंतरपटल पर हर्ष की स्याही से क्षणों को दकीचे जा रहा था । पेट से माथे तक बबंडर उठा हुआ था । लेखक मन व्याकुल था, बार-बार कोशिस करता था और शब्द अव्यवस्थित हो रहे थे । मैं हर क्षण को शब्दों की चादर में छुपाकर आप तक...