by crlavinash@gmail.com | Apr 17, 2015 | Medium
ना ग़मों का बादल हटा पाया, ना ही खुशियों की बारिश ला पाया, पुराने चिथड़े की तरह जिन्दगी दरकती रही, कश्मकश में मैं, कभी सिलता रहा, कभी ढकता रहा | फ़क़त फिक्र-ए-ख़ुराक में उलझा ‘बेपरवाह’ वक़्त गुजर जाता है, याद तुम भी आते हो, याद अपना घर भी आता है, पर सपनों की चाहत, अपनों की...
by crlavinash@gmail.com | Mar 30, 2015 | Medium
‘बेपरवाह’ धड़कने ठहर सी गयी है , जो मेरे कदमो की आहट उनके अहाते में हुई | (C) अविनाश ‘बेपरवाह’ ‘बेपरवाह’ नज़र से नज़र मत मिलाना, नज़र जो लग गयी, नज़ारे बदल जायेंगे | (C) अविनाश ‘बेपरवाह’ पूछा किसी ने ‘बेपरवाह’ मुस्कुराहटों का वजह तो बता दो, मैंने कहा पराई ख़ुशी है, जिसकी...
by crlavinash@gmail.com | Mar 30, 2015 | Medium
मैं रात भर जन्नत में था थी तलब जिनसे रूबरू कि, थी आरजू जिनसे गुप्तगू कि, वो चाँद कल मेरे आँगन में था | मैं रात भर जन्नत में था | मासूम चेहरा, अधरों पर मुस्कान लिए, झील सी आँखें, सुर्ख होंठ, घनेरी जुल्फ, यौवन में उफ़ान लिए , वो प्रतिरूप अप्सरा कि, नूर इस धरा की | वो...
by crlavinash@gmail.com | Mar 4, 2015 | Medium
by crlavinash@gmail.com | Mar 2, 2015 | Medium
ख़ामोश सड़क थी और झमाझम बारिश मैं भींगकर आज कपकपातीं हाड़ लेकर सड़क पर टहलता रहा | कुछ पेड़ पर मुस्कुराते, कुछ सड़क पर बिखड़े पलास और सेमल के फूल, मुझे याद आया वो तेरी अठखेलियाँ तेरा मुस्कुराना, मुझसे लिपट जाना एक हवा के झोकें में तेरा आहट पाया | तभी पैर फिसला, अभी पैर फिसला...
by crlavinash@gmail.com | Jan 8, 2015 | Medium
हार-जित से तो यूँ हीं बदनाम है जिन्दगी दरअसल, अनिश्चितताओं का खेल है जिन्दगी | जब तक सांस है, तुझमे जद है, सवार लो जिन्दगी | न जाने कब शमशान हो जिन्दगी | हँस लो, मुस्कुरा लो….. ढूँढ लो हर ख़ुशी | क्या पता कब खाक हो जिन्दगी | क्या फ़कीरी, क्या अमीरी क्या इबादत, क्या...