मैं और गंगा

मैं और गंगा

गंगा समंदर से मिलकर खुश तो नहीं होगी। मुझे पक्का यकीन है कि वह खुश तो नहीं है। मेरा यकीन बेशक मेरे पैमाने से है, पर क्या ‘मेरा पैमाना’ गलत हो सकता है? समंदर में मिलकर गंगा, गंगा कहाँ रह पाती है! वह मीठी नहीं रहती, कोई एक कतरा भी बोतल में समेटकर घर नहीं ले जाता, कोई...