by crlavinash@gmail.com | Jul 20, 2026 | Medium
गंगा समंदर से मिलकर खुश तो नहीं होगी। मुझे पक्का यकीन है कि वह खुश तो नहीं है। मेरा यकीन बेशक मेरे पैमाने से है, पर क्या ‘मेरा पैमाना’ गलत हो सकता है? समंदर में मिलकर गंगा, गंगा कहाँ रह पाती है! वह मीठी नहीं रहती, कोई एक कतरा भी बोतल में समेटकर घर नहीं ले जाता, कोई...