जिन्दगी शायद इसी भाग-दौड़ का नाम है——-अविनाश ‘बेपरवाह’

जिन्दगी शायद इसी भाग-दौड़ का नाम है——-अविनाश ‘बेपरवाह’

ना ग़मों का बादल हटा पाया, ना ही खुशियों की बारिश ला पाया, पुराने चिथड़े की तरह जिन्दगी दरकती रही, कश्मकश में मैं, कभी सिलता रहा, कभी ढकता रहा | फ़क़त फिक्र-ए-ख़ुराक में उलझा ‘बेपरवाह’ वक़्त गुजर जाता है, याद तुम भी आते हो, याद अपना घर भी आता है, पर सपनों की चाहत, अपनों की...

कुछ शेर ….बेपरवाह कलम से…..

‘बेपरवाह’ धड़कने ठहर सी गयी है , जो मेरे कदमो की आहट उनके अहाते में हुई | (C) अविनाश ‘बेपरवाह’ ‘बेपरवाह’ नज़र से नज़र मत मिलाना, नज़र जो लग गयी, नज़ारे बदल जायेंगे | (C) अविनाश ‘बेपरवाह’ पूछा किसी ने ‘बेपरवाह’ मुस्कुराहटों का वजह तो बता दो, मैंने कहा पराई ख़ुशी है, जिसकी...

कल रात भर …………………‘बेपरवाह’

मैं रात भर जन्नत में था थी तलब जिनसे रूबरू कि, थी आरजू जिनसे गुप्तगू कि, वो चाँद कल मेरे आँगन में था | मैं रात भर जन्नत में था | मासूम चेहरा, अधरों पर मुस्कान लिए, झील सी आँखें, सुर्ख होंठ, घनेरी जुल्फ, यौवन में उफ़ान लिए , वो प्रतिरूप अप्सरा कि, नूर इस धरा की | वो...
‘बेपरवाह’

‘बेपरवाह’

ख़ामोश सड़क थी और झमाझम बारिश मैं भींगकर आज कपकपातीं हाड़ लेकर सड़क पर टहलता रहा | कुछ पेड़ पर मुस्कुराते, कुछ सड़क पर बिखड़े पलास और सेमल के फूल, मुझे याद आया वो तेरी अठखेलियाँ तेरा मुस्कुराना, मुझसे लिपट जाना एक हवा के झोकें में तेरा आहट पाया | तभी पैर फिसला, अभी पैर फिसला...